कब शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि 2026

📅 25 Mar 2026

ज्योतिषियों के अनुसार, चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होगी और 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर यह तिथि समाप्त हो रही है। ऐसे में 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का त्योहार प्रारंभ होगा।

क्या है कलश स्थापना का शुभ समय
नवरात्रि के पहले दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है। यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है। इस दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

नौ दिनों की होगी नवरात्रि
19 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 1- अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
20 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 2- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
21 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 3- मां चंद्रघंटा पूजा
22 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 4- मां कुष्मांडा पूजा
23 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 5- मां स्कंदमाता पूजा
24 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 6- मां कात्यायनी पूजा
25 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 7- मां कालरात्रि पूजा
26 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 8- मां महागौरी पूजा ( इस दिन अष्टमी होगी। आप कन्या पूजन कर सकते हैं। )
27 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 9- मां सिद्धिदात्री पूजा ( इस दिन नवमी मनाई जाएगी। कन्या पूजन किया जाएगा )
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नवरात्रि में 9 दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा, कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन, दुर्गा सप्तशती पाठ, और "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र का जाप अनिवार्य है। लाल या पीले वस्त्र पहनकर, कलश स्थापना, रोली-अक्षत से तिलक, चुनरी, श्रृंगार, फूल और भोग (पताशा, लौंग) चढाकर माँ दुर्गा की पूजा करें।
नवरात्रि पूजन विधि (Navratri Pujan Vidhi):
कलश स्थापना (Kalash Sthapana): सुबह स्नानादि के बाद स्वच्छ स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें, उसमें गंगाजल, सिक्का, सुपारी डालें और ऊपर आम के पत्ते रखकर नारियल (लाल चुनरी में लिपटा हुआ) रखें।
पूजा प्रक्रिया (Puja Process): गणेश जी की पूजा के बाद माँ दुर्गा का आह्वान करें। प्रतिमा को रोली, मौली, सिंदूर, इत्र और चंदन का तिलक लगाएँ।
श्रृंगार और भोग (Offering): माता को चुनरी और 9 प्रकार के श्रृंगार सामग्री (बिंदी, मेहंदी, काजल आदि) अर्पित करें। भोग में फल, बताशा, लौंग, और मिठाई चढाएँ।
दीपक और आरती (Diya and Aarti): घी का दीपक जलाकर 'जय अंबे गौरी' आरती करें।

प्रमुख मंत्र (Main Mantras):
शक्ति मंत्र(Maa Durga Mantra): ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
आह्वान मंत्र (Invocation Mantra): ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।।
प्रार्थना मंत्र(Prayer Mantra): सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥।
सरल मंत्र (Simple Mantra): ॐ दुं दुर्गायै नमः।

नोट: प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा करें और माता को धूप-दीप दिखाएं। अंत में क्षमा याचना अवश्य करें.

आचार्य पं० महेश शास्त्री जी
संपर्क 8958261125

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